Maharajganj, उत्तर प्रदेश। जिला मुख्यालय स्थित अस्पताल में एक गर्भवती महिला के इलाज को लेकर परिजनों और चिकित्सक के बीच विवाद का मामला सामने आया है। परिजनों का आरोप है कि महिला की हालत गंभीर थी, प्रसव का समय नजदीक था और पानी गिर रहा था। इसी स्थिति में परिवार महिला को लेकर बेहतर और तत्काल इलाज की उम्मीद में जिला मुख्यालय पहुंचा था।
परिजनों के मुताबिक, अस्पताल पहुंचने के बाद उन्होंने डॉक्टर को महिला की स्थिति के बारे में बताया और तत्काल मरीज को देखने का अनुरोध किया। आरोप है कि डॉक्टर ने पहले रिपोर्ट दिखाने को कहा। रिपोर्ट दिखाने के बाद परिजनों को जांच कराने के लिए कहा गया। परिवार ने डॉक्टर से पहले मरीज को देखने का आग्रह किया, लेकिन आरोप है कि उन्हें तत्काल देखने के बजाय करीब दो घंटे बाद देखने की बात कही गई।
स्थिति को लेकर परिजन काफी परेशान हो गए। उनका कहना है कि महिला की हालत और प्रसव की संभावित स्थिति को देखते हुए दो घंटे तक इंतजार करना उनके लिए चिंता का विषय था। इसी दौरान अस्पताल में कहासुनी की स्थिति बनी और परिजनों ने घटना का वीडियो बनाना शुरू कर दिया।
“मरीज की हालत गंभीर है, पहले देख लीजिए”
परिजनों के अनुसार, अस्पताल पहुंचने के बाद उन्होंने डॉक्टर से कहा कि मरीज की हालत गंभीर है और पानी गिर रहा है। उन्होंने डॉक्टर से यह भी बताया कि बच्चा डिलीवरी होने की स्थिति में है और इसलिए पहले मरीज को देखकर उसकी स्थिति का आकलन किया जाए।
परिजनों का कहना है कि डॉक्टर ने उनसे रिपोर्ट मांगी। परिवार ने उपलब्ध रिपोर्ट डॉक्टर को दिखाई। इसके बाद जांच कराने के लिए कहा गया।
परिजन लगातार यह कहते रहे कि पहले मरीज को देख लिया जाए, इसके बाद डॉक्टर की सलाह के अनुसार जांच करा दी जाएगी। लेकिन आरोप है कि तत्काल मरीज को देखने के बजाय उन्हें इंतजार करने के लिए कहा गया।
परिजनों के अनुसार, इसी दौरान करीब दो घंटे बाद मरीज को देखने की बात कही गई, जिसके बाद परिवार के लोग नाराज हो गए।
मजबूरी में बनाना पड़ा वीडियो, परिजनों का दावा
परिजनों का कहना है कि वे अस्पताल किसी विवाद या हंगामे के लिए नहीं पहुंचे थे। उनका उद्देश्य सिर्फ गंभीर हालत में गर्भवती महिला को तत्काल चिकित्सकीय मदद दिलाना था।
परिजनों का आरोप है कि जब उनकी बात नहीं सुनी गई और स्थिति को लेकर विवाद बढ़ने लगा तो उन्हें मजबूरी में मोबाइल से वीडियो बनाना पड़ा। परिवार का दावा है कि बातचीत के दौरान उनके साथ कथित तौर पर बदतमीजी भी की गई।
महराजगंज जिला अस्पताल में गर्भवती महिला के इलाज को लेकर विवाद...
— X पोस्ट August 2026
हालांकि, इस पूरे मामले में संबंधित डॉक्टर या अस्पताल प्रशासन का आधिकारिक पक्ष अभी सामने नहीं आया है। इसलिए डॉक्टर द्वारा मरीज को देखने में देरी क्यों हुई और उस समय चिकित्सकीय स्थिति क्या थी, इसकी स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हो सकी है।
जिला अस्पताल को लेकर प्रशासनिक रिकॉर्ड में क्या है?
Maharajganj जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट पर जिला अस्पताल का पता फरेंदा रोड, निकट मुख्यालय, महराजगंज, उत्तर प्रदेश-273303 दिया गया है।
वहीं महराजगंज के जिला महिला अस्पताल में प्रसव से जुड़ी सुविधाओं को लेकर भी पूर्व में अस्पताल प्रशासन की ओर से जानकारी सामने आ चुकी है। नवंबर 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, जिला महिला अस्पताल में 24 घंटे ऑपरेशन से प्रसव की सुविधा उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई थी। इसके लिए गाइनी और सर्जन डॉक्टरों का कॉल-डे निर्धारित किया गया था और सामान्य प्रसव संभव नहीं होने की स्थिति में ऑपरेशन से प्रसव कराने की व्यवस्था बताई गई थी।
उसी रिपोर्ट में अस्पताल प्रशासन के हवाले से बताया गया था कि ऑपरेशन से प्रसव के लिए जरूरत पड़ने पर पैथोलॉजी जांच की सुविधा 24 घंटे उपलब्ध रहेगी और डॉक्टर की सलाह पर गर्भवती महिला की तत्काल जांच कराई जा सकती है।
इसके अलावा नवंबर 2025 में जिला महिला अस्पताल में 10 बेड का पोस्ट-ऑपरेटिव वार्ड शुरू किए जाने की भी जानकारी सामने आई थी, जिसमें ऑपरेशन के बाद गंभीर स्थिति वाली महिलाओं के इलाज की व्यवस्था बताई गई थी।
ऐसे मामलों में तत्काल चिकित्सकीय आकलन क्यों जरूरी?
गर्भवती महिला के प्रसव से जुड़े मामलों में मरीज की वास्तविक स्थिति का चिकित्सकीय आकलन डॉक्टर ही कर सकते हैं। पानी गिरने, प्रसव पीड़ा, रक्तस्राव या अन्य गंभीर लक्षणों की स्थिति में मरीज को कितनी तत्काल चिकित्सा की जरूरत है, यह जांच के बाद तय किया जाता है।
इसी वजह से इस मामले में भी सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि अस्पताल पहुंचने के समय महिला की वास्तविक चिकित्सकीय स्थिति क्या थी, डॉक्टर को उसकी स्थिति की जानकारी कब दी गई, मरीज का तत्काल चिकित्सकीय आकलन क्यों नहीं हुआ और यदि दो घंटे बाद देखने की बात कही गई तो उसका चिकित्सकीय आधार क्या था?
इन सवालों का जवाब अस्पताल प्रशासन की जांच या संबंधित चिकित्सक के आधिकारिक बयान से ही स्पष्ट हो सकेगा।
परिजनों ने जांच की मांग की
घटना के बाद परिजनों ने मामले की जांच की मांग की है। उनका कहना है कि अस्पताल प्रशासन को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करनी चाहिए और यह स्पष्ट करना चाहिए कि गंभीर हालत बताकर अस्पताल पहुंची गर्भवती महिला को तत्काल चिकित्सकीय जांच क्यों नहीं मिली।
परिजन यह भी चाहते हैं कि यदि अस्पताल की व्यवस्था या किसी कर्मचारी की कार्यप्रणाली में कोई कमी पाई जाती है तो उस पर आवश्यक कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी अन्य गर्भवती महिला और उसके परिवार को ऐसी परेशानी का सामना न करना पड़े।
अस्पताल प्रशासन का पक्ष सामने आना बाकी
फिलहाल इस घटना को लेकर अस्पताल प्रशासन या संबंधित डॉक्टर की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसलिए मरीज की चिकित्सकीय स्थिति, डॉक्टर द्वारा लिए गए निर्णय और कथित तौर पर दो घंटे बाद देखने की बात के कारणों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
अस्पताल प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान, जांच रिपोर्ट या स्पष्टीकरण सामने आने पर खबर को उसी के अनुसार अपडेट किया जाएगा।
नोट: इस खबर में डॉक्टर और अस्पताल से संबंधित आरोप मरीज के परिजनों द्वारा बताए गए घटनाक्रम पर आधारित हैं। संबंधित चिकित्सक/अस्पताल प्रशासन का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी खबर में शामिल किया जाना आवश्यक है।